Pregnancy Symptoms week-25 गर्भावस्था के 25वें सप्ताह के लक्षण
मां के शरीर में होने वाले बदलाव
गर्भावस्था के 25वें सप्ताह में आपका शरीर गर्भस्थ शिशु को सहारा देने के लिए लगातार बदलता रहता है। इस समय आपका पेट अधिक उभरा हुआ दिखाई देगा, जिससे गुरुत्वाकर्षण केंद्र बदल सकता है और आपको संतुलन बनाए रखने में थोड़ी कठिनाई हो सकती है।
शरीर में रक्त की मात्रा लगभग 50% तक बढ़ जाती है, जिससे आप अधिक गर्म महसूस कर सकती हैं और हल्की-हल्की पसीने की समस्या हो सकती है। आपका हृदय तेजी से धड़क सकता है, जिससे कभी-कभी हल्की थकावट या चक्कर आने का अनुभव हो सकता है।
शिशु का विकास
इस सप्ताह, आपका शिशु लगभग 34-35 सेंटीमीटर लंबा और 700 ग्राम तक वजन का हो सकता है। उसका शरीर अब पहले से अधिक भरा हुआ दिखने लगा है क्योंकि वसा जमने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
शिशु के फेफड़े तेजी से विकसित हो रहे हैं, और वह एम्नियोटिक द्रव को अंदर खींचकर बाहर छोड़ने का अभ्यास कर रहा है, जिससे सांस लेने की क्षमता विकसित हो सके। उसकी आँखों की पलकों का विकास पूरा हो चुका होता है, और अब वह हल्की रोशनी पर प्रतिक्रिया दे सकता है।
आप अपने शिशु की हलचल को पहले से अधिक महसूस करेंगी, क्योंकि वह अपनी बाहों और पैरों को फैलाने और सिकोड़ने की कोशिश कर रहा होता है।
सामान्य लक्षण
- थकान: बढ़ते वजन के कारण आप अत्यधिक थकान महसूस कर सकती हैं। आराम करें और जरूरत से ज्यादा काम न करें।
- नींद की समस्या: पेट के बढ़ने के कारण रात में करवट बदलना मुश्किल हो सकता है। तकिए की मदद से सहारा लें और आरामदायक स्थिति में सोने की कोशिश करें।
- अपच और एसिडिटी: पेट में जलन और भारीपन महसूस हो सकता है। खाने के बाद तुरंत लेटने से बचें और हल्का भोजन करें।
- मांसपेशियों में ऐंठन: रात के समय पैरों की ऐंठन परेशान कर सकती है। मैग्नीशियम और कैल्शियम युक्त आहार लें और हल्की स्ट्रेचिंग करें।
- त्वचा पर खिंचाव के निशान: पेट, जांघों और स्तनों पर स्ट्रेच मार्क्स आ सकते हैं। त्वचा को मॉइस्चराइज करें और पर्याप्त पानी पिएं।
देखभाल और सुझाव
- हल्के व्यायाम करें, जैसे टहलना और स्ट्रेचिंग, ताकि शरीर लचीला बना रहे और प्रसव के लिए तैयार हो।
- अधिक पानी पिएं और फाइबर युक्त आहार लें ताकि कब्ज की समस्या न हो।
- आरामदायक मुद्रा में सोने की कोशिश करें, बाईं करवट सोना बेहतर रहता है क्योंकि इससे रक्त संचार सुचारू रहता है।
- प्रसव की तैयारी के लिए योग और श्वास अभ्यास करें, ताकि शरीर और मन दोनों तैयार हो सकें।
- डॉक्टर की नियमित जांच करवाएं और सभी आवश्यक पोषक तत्वों का सेवन करें, ताकि शिशु का सही विकास हो सके।